Friday, February 06, 2026

प्रो. राम अशीष की दो पुस्तकों ' कुछ अनुत्तरित प्रश्न' तथा ' किसी और को दोष क्यों दूँ' का लोकार्पण


डेहरी ऑन सोन । ।  'साहित्य संगम' तथा 'पहचान' पत्रिका के तत्वाधान में शहर के सुभाष नगर में प्रो. राम अशीष की दो पुस्तकों ' कुछ अनुत्तरित प्रश्न' तथा ' किसी और को दोष क्यों दूँ' का लोकार्पण हुआ। जिसकी अध्यक्षता सीडी सिंह ने किया । मुख्य अतिथि के तौर पर शहर के मशहूर चिकित्सक व समाजसेवी डॉ. निर्मल सिंह ने की । इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रो.राम अशीष सिंह ने समाज और व्यवस्था की सच्चाई को गहरे में देखा है और उसे बारीकी से लेखबद्ध किया है । कथाकार सीडी सिंह ने कहा कि राम अशीष सिंह की समझ बहुत स्पष्ट है । उनके प्रश्न अनुत्तरित कर देने वाले हैं । डॉ. हरेराम सिंह ने कहा कि राम अशीष सिंह की कविता ओबीसी कविता की अच्छी कविताओं में से हैं, जिनमें प्रतिरोध जगह- जगह मौजूद है। अभिषेक कुमार अभ्यागत ने कहा कि राम अशीष सिंह एक अच्छे कवि हैं, उनकी स्त्री पर लिखी कविताएँ नए ढंग की हैं। लोकार्पण व पुस्तक- चर्चा के बाद इस एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें शहर के कई कवियों ने अपनी- अपनी कविताएँ प्रस्तुत की। जिनमें  डॉ. रामनाथ सिंह ने 'फिर भी हम जिंदा हैं', हरेराम सिंह ने ' नपुंसक राजधानी', अभिषेक कुमार अभ्यागत ने ' केंद्र में आने की लड़ाई', ' एक स्त्री का स्पर्श' , निरंजन कुमार ' निर्भय ' ने 'ओ नेल्सन मंडेला', राम अशीष सिंह' ने 'मदर इंडिया', 'सत्य', 'भस्मासुर की जननी', शंभू कुमार सिंह ने 'दहेज की आग' मुख्य रहीं । संगीत शिक्षक राजेश जी ने सूरदास की 'अँखिया हरिदर्शन को प्यासी' का गायन किया। स्नेह भारती, सुगम कुमारी, आयुषी, विभा भारती, मुकुल, कार्तिक तथा परी कुमारी ने भी अपनी- अपनी कविताओं का पाठ किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुमार राजेश्वर ने किया।

No comments:

Post a Comment